Palitana 5 Chaityavandan In Hindi _best_ Full [ CERTIFIED | 2026 ]

सिद्धचल गिरि भेट्या रे, धन्य भाग्य हमारा।ए गिरि चरणनी महिमा मोटी, कहेता न आवे पारा;रायण रूख समोसर्या स्वामी, पूर्व नवानुं वारा रे... ॥ धन्य ॥मूलनायक श्री आदि जिनेश्वर, चौमुख प्रतिमा चारा;अष्ट द्रव्य शुं पूजो भावे, समकित मूल आधारा रे... ॥ धन्य ॥भाव भक्ति शुं प्रभु गुण गावे, अपना जन्म सुधारा;यात्रा करी भविजन शुभ भावे, नरक तिर्यंच गति वारा रे... ॥ धन्य ॥दूर देशांतर थी हुं आव्यो, श्रवणे सुणी गुण तोरा;पतित उद्धारण बिरुद तमारुं, ए तीरथ जग सारा रे... ॥ धन्य ॥संवत अढार त्र्यांसी मास अषाढा, वदि आठम सोमवारा;प्रभुजी के चरण प्रताप के संघ में, 'खिमारतन' प्रभु प्यारा रे... ॥ धन्य ॥

पालिताना (Shatrunjay Mahatirth) की यात्रा जैन धर्म के सबसे पवित्र अनुष्ठानों में से एक है। यहाँ की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक आप पूर्ण नहीं करते। यह ब्लॉग आपको इन पांचों चैत्यवंदन के अर्थ, क्रम और हिंदी लिरिक्स की पूरी जानकारी प्रदान करेगा। चैत्यवंदन क्या है? palitana 5 chaityavandan in hindi full

उस शत्रुंजय पहाड़ी को, जो सभी शत्रु रूपी कर्मों का दहन करने वाली है, जहाँ जिनेन्द्र भगवान का विहार हुआ, उस क्षेत्र को मैं इस भवसागर (संसार) में नमस्कार करता हूँ। उस शत्रुंजय पहाड़ी को