अष्टावक्र गीता के अंतिम पांच अध्यायों में, ऋषि अष्टावक्र और जनक राजा के बीच मुक्ति और आत्म-साक्षात्कार पर चर्चा होती है। ऋषि अष्टावक्र जनक राजा को समझाते हैं कि मुक्ति क्या है और यह कैसे आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त करने में मदद करती है।
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